पुराणों के अनुसार भगवान कल्कि किस के घर जन्म लेने वाले है ?
श्रीमद् भागवत महापुराण के 12 वें स्कंद के 24 वें श्लोक में कहा गया है, जिसके अनुसार गुरु,सूर्य और चन्द्रमा जब एक साथ पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे तो भगवान कल्कि का जन्म होगा।
सम्भल ग्राम मुख्यस्य ब्राह्मणस्य महात्मनः
भवने विष्णुयशसः कल्कि प्रादुर्भाविष्यति ।।
पुराणों के मुताबिक कल्कि उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद जिले के समीप संभल नामक स्थान में भगवान विष्णु के 10 वें अवतार के रूप में अवतरित होंगे। इनके सभी भाई देवताओं के अवतार होंगे और धर्म की स्थापना में सहयोग देंगे।
पौराणिक कथाओं के मुताबिक कलियुग में पाप की अधिकता होने पर दुष्टों के संहार के लिए कल्कि अवतार होगा।
इनका वाहन देवदत्त नाम का सफेद घोड़ा होगा। यह पापियों का संहार करेंगे और साधु-संतों व शुद्ध मन वाले लोगों की रक्षा करेंगे।
कल्कि पुराण के मुताबिक कल्कि भगवान का जन्म सावन माह की संध्या व्यापिनी तिथि में होगा।
श्रीमद्भागवत पुराण और कल्कि पुराण के मुताबिक भगवान कल्कि का अवतार कलियुग की समाप्ति और सतयुग में संधिकाल में होगा।
क्या आप जानते हैं, कल्कि अवतार के जन्म लेंने के विषय मे अन्य मान्यता क्या है ?
ऐसा कहा जाता है कि भगवान कल्कि तब प्रकट होंगे जब 3 पवित्र नदियां, गंगा, सरस्वती और यमुना एक-एक करके स्वर्ग लौट आएंगी। (जैसा कि हम देख सकते हैं कि सरस्वती पूर्ण रूप से समाप्त हो गई है, यमुना जी पूरी तरह से सूखने के किनारे पर है जब गंगा जी भी गन्दगी के कारण विलुप्त होने को है।)
भगवान विष्णु का कल्कि अवतार निष्कलंक अवतार के नाम से भी जाना जायेगा, इनमे 64 कलाएं होंगी।
इस अवतार में उनकी माता का नाम सुमति होगा | इनके अलावा कल्कि भगवान के 3 बड़े भाई भी होंगे | जिनके नाम क्रमशः सुमन्त, प्राज्ञ और कवि होंगे |
याज्ञवलक्य जी उनके पुरोहित और भगवान परशुराम उनके गुरु होंगे | भगवान कल्कि जी की दो पत्नियाँ होंगी | लक्ष्मी रुपी पदमा और वैष्णवी रुपी रमा | उनके पुत्रो के नाम जय, विजय, मेघमाल तथा बलाहक |
पौराणिक मान्यता के अनुसार कलियुग 432000 वर्ष का है जिसका अभी प्रथम चरण ही चल रहा है । कलियुग का प्रारंभ 3102 ईसा पूर्व से हुआ था, इसका अर्थ हुआ कि 3102 + 2020 = 5122 वर्ष कलियुग के व्यतीत हो गए हैं और 426878 वर्ष अभी शेष है ।
और लगभग पौने तीन सौ साल से ही कल्कि भगवान की पूजा, आरती और प्रार्थना शुरू हो गई है।
मुझे जो ज्ञात था मैंने संक्षेप में बताने का प्रयास किया है ये बहुत विस्तृत होते है, इसमें कोई त्रुटि रह गयी हो तो स्वविवेक और धैर्य से व्यवहार करें | टिप्पणियों में समय व्यतीत न करे उससे अकारण नकारात्मकता का संचार होता है।
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