मुख्य सामग्रीवर वगळा

पोस्ट्स

जानेवारी, २०२६ पासूनच्या पोेस्ट दाखवत आहे

🤔 तुम्ही बाळाला 'Antibiotic औषध' देताय की भविष्यातल्या मृत्यूच एडवांस बुकिंग ?

"डॉक्टर, तो साध्या 'पॅरासिटॅमॉल'ने बरा होणार नाही हो... तुम्ही त्याला ते 'स्ट्राँग एंटीबायोटिकच द्या. उद्या मुलाची ट्रीप आहे, आम्हाला रिस्क नकोय!" त्या सुशिक्षित बापाचं हे वाक्य ऐकून माझ्या अंगाचा तिळपापड झाला. त्यांना 'रिस्क' नको होती. कळस म्हणजे, त्या ५ वर्षांच्या मुलाला फक्त व्हायरल सर्दी होती, आणि त्याचे वडील स्वतःच्या हाताने त्याच्या शरीरात एका 'भस्मासुरा'ला जन्म द्यायला निघाले होते. आज मला गप्प बसणं जमणार नव्हतं. मी पेन खाली ठेवला आणि त्यांना म्हणालो, "दादा, तुम्हाला १९४५ सालचा सर अलेक्झांडर फ्लेमिंग यांचा इशारा माहित आहे ?" ज्या माणसाने 'पेनिसिलिन' (जगातील पहिले अँटीबायोटिक) शोधून मानवजातीला मृत्यूच्या दाढेतून वाचवलं, त्या माणसाने नोबेल पारितोषिक घेताना थरथरत्या आवाजात सांगितलं होतं... "जो अडाणी माणूस गरज नसताना एंटीबायोटिक चा वापर करेल, तोच माणूस भविष्यात बॅक्टेरियाला 'ताकद' देईल आणि स्वतःच्या विनाशाला कारणीभूत ठरेल." आज ८० वर्षांनंतर आपण तेच पाप करतोय. आपण फ्लेमिंगचा शोध फुकट घालवलाय. युद्ध शरीराच्या आतल...

🚀 *Start Your Own Business Today!* मोबाईलवरून काम – Anytime, Anywhere 📱

  📢 *अरे भाई, सुना क्या?  भारत का अपना सोशल-मीडिया (All-In-One) ऐप आ गया हैं और यहा से शानदार इनकम हो रही हैं। आज नहीं तो कल हर किसी को ये App इस्तेमाल करना ही होगा। 💯* *💵 हम रोज़ PhonePe, Paytm, Google Pay से पेमेंट करते हैं, लेकिन उससे कमाई नहीं होती!💰* *🎼 हम रोज फेसबुक, इस्टाग्राम, WhatsApp, यूट्यूब, टेलीग्राम चलाते और देखते हैं, लेकिन कमाई नही होती! 🎞️* *🛒 हम अमेजन, फ्लिपकार्ड, मेशो, मंत्रा से अनलाईन शॉपिंग करते हैं, लेकिन कमाई नही होती! 🛍️* 📢 *अब भारत में लॉन्च हुआ स्वदेशी App – Useme Social Saving App, जिसमें सोशल-मीडिया, शॉपिंग रिचार्ज, बिल पेमेंट, चैटिंग, कॉलिंग और 2200+ से ज्यादा Services हैं। 🖇️* 🌎 *Social-Media, Shopping, Recharge, EMI, LIC, Insurance, Bijli Bill, Loan, PAN, AEPS – सब एक App में और साथ मे Cashback/इनकम भी! 🎁* 👉 अभी डाउनलोड करिए और सोशल मीडिया रेवोल्यूशन का हिस्सा बनिए 👇 https://play.google.com/store/apps/details?id=com.useme.wallet&referrer=UM379751 *Refer Code* : UM379751 *🙂 Thanks For Taking A Moment To Read This Message. 😊*

८० वर्षांच्या सुदैवी जीवनाचे ४४ मंत्र...

डॉ. वाडा (वय ६१ वर्षे) हे वृद्धांच्या मानसिक आजारांवर उपचार करणारे तज्ज्ञ आहेत. त्यांनी “८० वर्षांच्या सुदैवी जीवनाचे रहस्य” ४४ वाक्यांत मांडले आहे. ती वाक्ये खालीलप्रमाणे आहेत... *🌿 ८० वर्षांच्या सुदैवी जीवनाचे ४४ मंत्र 🌿* 1. सतत हलत राहा. 2. राग आला तर खोल श्वास घ्या. 3. शरीर कडक होऊ नये म्हणून पुरेशी हालचाल करा. 4. उन्हाळ्यात ए.सी. वापरत असाल तर अधिक पाणी प्या. 5. डायपर (वृद्धांसाठी) वापरल्याने हालचाली अधिक सोप्या होतात. 6. जास्त वेळा चावल्याने मेंदू आणि शरीर अधिक सक्रिय राहते. 7. विस्मरण वयामुळे नसते, तर मेंदूचा वापर कमी केल्याने होते. 8. खूप औषधे घेण्याची गरज नाही. 9. रक्तदाब आणि साखर अनावश्यकरीत्या कमी करण्याची गरज नाही. 10. एकटे राहणे म्हणजे एकाकीपणा नव्हे; ती शांततेत घालवलेली वेळ असते. 11. आळस करणे लाजिरवाणे नाही. 12. ड्रायव्हिंग लायसन्ससाठी पैसे खर्च करण्याची गरज नाही (जपानमध्ये वयोवृद्धांनी लायसन्स परत देण्याची मोहीम चालू आहे). 13. जे आवडते ते करा; जे नकोसे वाटते ते करू नका. 14. वय वाढले तरी नैसर्गिक इच्छा कायम राहतात. 15. कुठल्याही परिस्थितीत घरातच बसून राहू नका. 16. जे आव...

पंडित दीनानाथ मंगेशकर...

भारतीय संगीत जगत में मंगेशकर परिवार का नाम लेते ही सबसे पहले स्वर कोकिला लता मंगेशकर का चेहरा सामने आता है, लेकिन बहुत कम लोग उस मजबूत नींव को याद करते हैं, जिस पर यह पूरी सुरों की इमारत खड़ी हुई। उस नींव का नाम है पंडित दीनानाथ मंगेशकर। आज उनकी जयंती पर यह जरूरी हो जाता है कि हम सिर्फ लता दीदी के पिता के रूप में नहीं, बल्कि एक महान गायक, प्रभावशाली रंगमंच कलाकार, नाटककार और संगीत साधक के रूप में उन्हें याद करें। दीनानाथ मंगेशकर वह व्यक्ति थे, जिनके जीवन की साधना, संघर्ष और कला ने आने वाली पीढ़ियों को सुरों की दिशा दी। मंगेशी गांव से संगीत की शुरुआत... 29 दिसंबर 1900 को गोवा के मंगेशी गांव में जन्मे दीनानाथ मंगेशकर के जीवन में संगीत कोई संयोग नहीं था, बल्कि परंपरा थी। उनके पिता गणेश भट्ट हार्डीकर मंदिर के पुजारी थे और मां येसुबाई मंदिर में भजन गाया करती थीं। मां की गोद में बैठे-बैठे भजनों की धुन सुनना ही दीनानाथ का पहला संगीत पाठ था। बाद में उन्होंने अपने गांव मंगेशी के नाम पर अपना उपनाम मंगेशकर रख लिया, जो आगे चलकर भारतीय संगीत के इतिहास में अमर हो गया। बहुत कम उम्र में ही यह साफ हो ग...

भारत... आपली मानसिकता...

*एकदा मन लावुन वाचाच* खूप चांगली माहिती आहे... भारतात इंग्रज आले, फक्त १७९... नंतर १००० झाले,  नंतर १०,०००  आणि, नंतर १,००००० झाले. आणि या एक लाख इंग्रजांनी आपल्या ३० करोड जनतेवर राज्य केले.  कसे बर शक्य झाले ? कारण जे १७९ पहिल्यांदा आले होते, त्यांनी आपला लोकांचा चांगला अभ्यास केला होता. आणि त्यांनी एक निष्कर्ष काढला जो आजही २०२५ साली ही लागू होतो, तो म्हणजे भारतीय लोकांना...  जाती-भेद,  धर्मभेद,   गरीब-श्रीमंत,  प्रांत भेद या गोष्टींमध्ये पेटवायचे. मग हे ३० काय ३०० करोड जरी झाले तर, कधीही आपल्याबरोबर लढणार नाहीत. कारण, ते एकमेकांनाच कापत बसतील, पण कधीही एक होऊ शकणार नाहीत. एवढा द्वेष मनामध्ये भरेल.  मी👉आदिवासी  मी 👉मराठा   मी 👉सोनार  मी 👉धनगर   मी 👉चांभार   मी 👉 कुंभार   मी 👉मांग  मी 👉महार   मी 👉ब्राम्हण   मी 👉माळी  मी 👉तेली   मी 👉आमुक  आणि मी 👉तमुक... झालं यातच आम्ही आमचे श्रेष्ठत्व मानतो. (मित्रांनो ६७४२ जाती आहेत) आज आम्ही एवढे मोठ...

वालाच्या शेंगांची (पावट्याच्या शेंगा) झणझणीत आणि चटपटीत मसाला भाजी

वालाच्या शेंगांची (पावट्याच्या शेंगा) झणझणीत आणि चटपटीत मसाला भाजी करण्याची सोपी रेसिपी दिली आहे. 👉साहित्य : वालाच्या शेंगा : २५० ग्रॅम (सोलून घेतलेले दाणे) कांदा : १ मध्यम (बारीक चिरलेला) टोमॅटो : १ छोटा (बारीक चिरलेला) आले-लसूण पेस्ट : १ चमचा वाटण (चवीसाठी) : २ चमचे ओलं खोबरं आणि थोडी कोथिंबीर (एकत्र वाटून) मसाले : १ चमचा लाल तिखट (मालवणी किंवा कांदा-लसूण मसाला), १/२ चमचा हळद, १ चमचा धने पूड, १/२ चमचा गरम मसाला. फोडणीसाठी : तेल, मोहरी, जिरे, कढीपत्ता आणि हिंग. इतर : चवीनुसार मीठ आणि बारीक चिरलेली कोथिंबीर.  👉कृती: १. दाणे वाफवून घ्या :  प्रथम सोललेले वालाचे दाणे थोडे पाणी घालून कुकरमध्ये किंवा पातेल्यात ५-७ मिनिटे वाफवून घ्या (दाणे जास्त मऊ होऊ देऊ नका). २. फोडणी तयार करा :  कढईत २ मोठे चमचे तेल गरम करा. त्यात मोहरी, जिरे, हिंग आणि कढीपत्ता घालून फोडणी द्या. ३. कांदा-टोमॅटो परता :  आता बारीक चिरलेला कांदा घालून गुलाबी रंगावर परता. त्यानंतर आले-लसूण पेस्ट आणि टोमॅटो घालून टोमॅटो मऊ होईपर्यंत परता. ४. मसाले टाका :  गॅसची फ्लेम कमी करा आणि हळद, लाल तिखट, धने पू...

वसंत देसाई...

हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जो सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समय के साथ सिनेमा की आत्मा बन जाते हैं। वसंत देसाई उन्हीं चुनिंदा संगीतकारों में से एक थे, जिनकी धुनें आज भी सुनते ही मन को एक अलग ही दुनिया में ले जाती हैं। उनका संगीत केवल गीतों तक सीमित नहीं था, बल्कि फिल्मों के हर दृश्य में भाव भर देने की अद्भुत कला उन्हें बाकी संगीतकारों से अलग बनाती है। वसंत देसाई की रचनाओं में शास्त्रीय संगीत की गहराई थी, लोकधुनों की मिठास थी और सबसे बढ़कर मानवीय संवेदनाओं की सच्चाई थी, जो आज भी श्रोताओं को बांधकर रखती है। बचपन, संघर्ष और संगीत की पहली सीख... वसंत देसाई का जन्म 9 जून 1912 को सिंधुदुर्ग जिले के सावंतवाड़ी क्षेत्र के सोनावड़े गांव में हुआ था। उनका असली नाम आत्माराम देसाई था। उनका बचपन आसान नहीं था। माता-पिता के अलगाव के कारण वे अपनी मां मुक्ता बाई के साथ रहे, जिन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों में बच्चों की परवरिश की। इसी दौर में उनके नाना भास्कर पारुलेकर, जो अपने इलाके के प्रसिद्ध कीर्तनकार थे, वसंत देसाई के जीवन में एक मजबूत सहारा बने। मंदिरों में गूंजते भजन, की...

नाना पाटेकर...

l हिंदी सिनेमा में अगर किसी अभिनेता को अभिनय का पर्याय कहा जाए, तो नाना पाटेकर का नाम खुद-ब-खुद सामने आ जाता है। 75 साल की उम्र में भी उनकी आवाज़, आंखों की आग और संवादों की धार वैसी ही है, जैसी दशकों पहले थी। लेकिन नाना की असली कहानी सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं है। उनकी जिंदगी के फैसले, संघर्ष, सादगी और सोच उन्हें भीड़ से बिल्कुल अलग खड़ा करती है। उनका जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के मुरुड-जंजीरा में हुआ। एक छोटे से कस्बे से निकलकर नेशनल अवॉर्ड और पद्मश्री तक पहुंचने वाला यह सफर आसान नहीं था, बल्कि दर्द, त्याग और आत्मसंघर्ष से भरा हुआ था। सिर्फ 750 रुपये में शादी, जब कमाई थी 50 रुपये... आज जहां सितारे करोड़ों की शादियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हैं, वहीं नाना पाटेकर की शादी सादगी की मिसाल बन गई। साल 1978 में नाना ने नीलकांति पाटेकर से विवाह किया, जब वे थिएटर में काम करते थे और प्रति शो केवल 50 रुपये कमाते थे। अगर महीने में 15 शो हो जाते, तो कुल कमाई 750 रुपये होती थी। नीलकांति उस वक्त बैंक में अफसर थीं और 2500 रुपये महीना कमाती थीं। दोनों की कुल आमदनी 3250 रुपये थी, जिसे...

गुरु गोविंद सिंह जी...

इतिहास में कुछ संघर्ष ऐसे होते हैं जो केवल युद्ध नहीं होते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए चेतावनी और प्रेरणा बन जाते हैं। गुरु गोविंद सिंह जी और मुगल बादशाह औरंगज़ेब के बीच हुआ टकराव भी ऐसा ही था। यह जंग सिर्फ़ तलवारों, तीरों और सेनाओं की नहीं थी, बल्कि विचारों की थी। एक तरफ़ धार्मिक स्वतंत्रता, मानवीय गरिमा और न्याय का पक्ष था, तो दूसरी ओर सत्ता का अहंकार, ज़बरदस्ती का धर्मांतरण और भय के ज़रिये शासन करने की नीति। गुरु गोविंद सिंह जी की जयंती के अवसर पर यह कहानी सिर्फ़ अतीत को देखने का मौका नहीं देती, बल्कि यह भी बताती है कि अन्याय के सामने झुकने से इनकार कैसे इतिहास रचता है। टकराव की पृष्ठभूमि : ज़ुल्म की नींव और विरोध की चिंगारी... सिखों और मुग़लों के बीच टकराव की जड़ें औरंगज़ेब के शासन से पहले ही पड़ चुकी थीं। पाँचवें गुरु, गुरु अर्जन देव जी की शहादत ने यह स्पष्ट कर दिया था कि सत्ता सिख परंपरा की स्वतंत्र चेतना से असहज है। लेकिन औरंगज़ेब के दौर में यह असहजता खुली दुश्मनी में बदल गई। उसने अपने शासन को धार्मिक कठोरता के ज़रिये मज़बूत करने की कोशिश की। मंदिरों का विध्वंस, जज़िया कर की...

जतिन खन्ना “पहले सुपरस्टार”...

  29 दिसंबर… एक ऐसी तारीख, जिसने हिंदी सिनेमा को उसका पहला सुपरस्टार दिया। साल 1942 में अमृतसर में जन्मे जतिन खन्ना, जो आगे चलकर राजेश खन्ना बने, सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि एक दौर थे। ऐसा दौर, जिसने स्टारडम की परिभाषा ही बदल दी। उनके नाम के आगे “पहले सुपरस्टार” का तमगा यूं ही नहीं जुड़ा। इसके पीछे संघर्ष, किस्मत, दीवानगी और प्यार की ऐसी कहानियां हैं, जो आज भी लोगों को बांध लेती हैं। 10,000 चेहरों में से चुना गया एक नाम... राजेश खन्ना का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। 1960 के दशक में ऑल इंडिया यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स टैलेंट कॉम्पिटिशन में करीब 10,000 से ज्यादा कंटेस्टेंट्स ने हिस्सा लिया था। उन हजारों चेहरों के बीच राजेश खन्ना उन आठ फाइनलिस्ट्स में शामिल हुए, जिनकी किस्मत चमकनी थी। इनाम में उन्हें चेतन आनंद की ‘आखिरी खत’ और रविंद्र दवे की ‘राह’ मिली। यहीं से हिंदी सिनेमा को एक ऐसा चेहरा मिला, जो आगे चलकर इतिहास रचने वाला था। ‘आराधना’ और एक रात में बना सुपरस्टार... 1969 में शक्ति सामंत की ‘आराधना’ रिलीज हुई और राजेश खन्ना रातोंरात स्टार बन गए। यह सिर्फ एक हिट फिल्म नहीं थी, ...

2026 साठी तुमच्यासाठी खास बिझनेस... पूर्णपणे मोबाईल वर करू शकता...

        *Today's Prayer (01 January)* *Lord Jesus Christ, I exalt your name above every other name. For in you I have pardon, mercy, grace and victory over sin and death. You humbled yourself for my sake and for the sake of all sinners by sharing in our humanity and by dying on the cross. Help me to always praise your holy name and to live for your greater glory. Amen* Happy New Year 2026              *आजची प्रार्थना (०१ जानेवारी)* *हे प्रभु येशू ख्रिस्ता, मी तुझे नाव इतर सर्व नावांपेक्षा उंच करतो. कारण तुझ्यामध्ये मला क्षमा, दया, कृपा आणि पाप आणि मृत्यूवर विजय मिळाला आहे. तू माझ्यासाठी आणि सर्व पापींजनाच्या उद्धारासाठी आमच्या मानवी स्वभावात सहभागी होऊन आणि वधस्तंभावर मरण पत्करून स्वतःला नम्र केलेस. तुझ्या पवित्र नावाची नेहमी स्तुती करण्यास आणि तुझ्या महान वैभवासाठी जगण्यास मला मदत कर. आमेन* नविन वर्षाच्या हार्दिक शुभेच्छा... ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ *कोशिश करने वालों की कभी हार नही होती....* लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, ...