ग़ज़ल इश्क़ में फिर ठगा गया मुझको, बेवफ़ा जो कहा गया मुझको। सामने था सभी के मैं लेकिन, काग़ज़ों में लिखा गया मुझको। वो लिए था गुलाब हाथों में, खार फिर भी चुभा गया मुझको। चैन से सो नहीं सकी आँखें, ख़्वाब झूठे दिखा गया मुझको। बात उसकी लगी अजब यूँ फिर, याद करके भुला गया मुझको। ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ कमी तो होनी ही है पानी की शहर में, न किसीकी आँख में बचा है और न किसी के जज़्बात में !! दिल में खोट है जुबान से प्यार करते है, कुछ लोग दुनिया में बस यही व्यापार करते है !! हमसे मिलना है तो वक्त चुराना सिखो.. 🍁 मोहब्बत कोई फुरसत का खेल नहीं.. तुमको भी जब अपनी कसमें अपने वादे याद नहीं हम भी अपने ख़्वाब तेरी आँखों में रख कर भूल गए..!! हमारे अपने कभी हमें रुलाते नहीं है, ...... रुलाते तो वो है जिन्हें हम अपना समझने की गलती करते है !! इतनी चाहत तो लाखो रुपए पाने की भी नहीं होती जित...
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