क्या आप जानते हैं कि रामायण के अनुसार केवल सांस लेना ही जीवन नहीं है? लंका युद्ध के दौरान जब राम और रावण आमने सामने थे, तब अंगद ने रावण से कहा था... “तुझे मारने का क्या लाभ? तू तो पहले ही मरा हुआ है!” रावण चकित हुआ। तब अंगद ने वे 14 दुर्गुण बताए, जिनके कारण कोई व्यक्ति जीवित होते हुए भी मृतक माना जाता है। त्रेतायुग का यह उपदेश आज भी सौ प्रतिशत सच साबित होता है। विचार कीजिए — क्या ये गुण अनजाने में आपके भीतर भी तो नहीं? 🔥 14 दुर्गुण जो मनुष्य को जीवित रहते हुए भी मृत समान बनाते हैं 1. कामवश (अत्यधिक भोग-विलासी) : जो व्यक्ति वासना और क्षणिक भोगों का दास बन जाए, उसका जीवन निरर्थक हो जाता है। 2. वाममार्गी (नकारात्मक विद्रोही) : जो हर समय समाज-विरोधी, नियम-विरोधी और नकारात्मक मार्ग पर चलता है। 3. अतिशय कृपण (अति कंजूस) : धन होते हुए भी धर्म, दान या सद्कर्म में एक पैसा न खर्च करने वाला मनुष्य। 4. अति दरिद्र (आत्मबलहीन) : केवल रुपये से नहीं—जो आत्मविश्वास, हिम्मत और सम्मान से भी दरिद्र हो। 5. विमूढ़ (विवेकहीन/मूर्ख) : जो न अपना निर्णय ले सके, न बुद्धि का प्रयोग करे, और हर बात में दूसरों पर न...
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